Sunday, 27 November 2011

फिर?

फिर क्या,
शब्दो की व्यथा,
निरर्थक कथा;
अकेले खड़े
या, प्रांगन गढ़ा;
थिरकती कविता
कैसे बने;
जो कोई कहे,
कोई सुने
बीच कहीं,
नए रिश्ते बुने...

Saturday, 26 November 2011

योनिपथ (dedicated to Linga-Soni)

Original Photo by Garima Jain (Tehelka). Here an adapted image found online.

वृक्ष न हों खडें
ना जियें, ना लडें
ना आदि, ना वासी हो
विकास मरूभूमि में
लिंगम तू,
रहे समर्थ, रहे समर्थ, रहे समर्थ,
योनीपथ,योनिपथ, योनिपथ I

मेरी जमीन सा मेरा रंग;
मेरी मिटटी सा मेरा तन;
सत्ता के रास में
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
छीन ले
योनिपथ, योनिपथ, योनिपथ I

कंपनियों के मुकाम पर
आवाम को कर बलि
विकास की राह पर
तू ना थमेगा कभी,
तू ना मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
योनिपथ, योनिपथ, योनिपथ I

हरवंश तुम कह गए,
"यह महान द्रश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रु स्वेद रक्त से
लथपथ, लथपथ, लथपथ"
योनिपथ, योनिपथ, योनिपथ I

Thursday, 24 November 2011

सिरा

अब ऐसा क्यूँ होता है,
बातें तभी शुरू होती हैं
जब तुम करना चाहते हो,
ऊन की गेंद जैसे;
एक सिरा तुम मेरी तरफ उछालते हो
क्या तुम नहीं जानते,
सिरे जब खुलने लगते है;
तो साथ जोड़े तो रखते है
बांधते नहीं;
शायद तुम सोचते होंगे,
कि दूसरा सिरा मेरे पास है,
मैं भी ऐसा ही सोचती हूँ
शायद दूसरा सिरा तुम्हारे पास हो....

Wednesday, 9 November 2011

nightmares and dreams

you were there
today,
weren't you?
when i walked past you at Trafalgar
banner in one hand
screams-'toris you must go'
the girl in blue pants tweeted on her blackberry
'come join us, for this is our story'
some played drums, others violin;
gliding gloriously, all of us in unison;
it was then that u turned;
as if; you were in a hurry;
as if; the ground beneath you was slippery;
and you wanted to take everyone into
the labyrinthine St' Paul's
choppers swirled by
you told us what occupation means
in the Westminster walls
i was right there;
behind you;
awaiting you to turn again,
for you to say once more;
'white paper- catch it, bin it, kill it'
to hold your eyes with mine;
and to tell you to count me in all your schemes,
for their nightmares are our dreams.

source: http://www.flickr.com/groups/student-protest-posters-and-placards/pool/show/


गुफ्तगू

अभी अभी समझा, कि ;
अक्सर जिंदगी
गलियारों में ही;
कट जाती है,
इसलिए;
और कुछ न कहेंगे;
चुप रहेंगे,
फिर से;
मुल्तानी तख्ती पर
नए रंग भरेंगे,
पहली पहचान हो जैसे;
अपनी हस्ती से हम, अब;
गुफ्तगू करेंगे |

Saturday, 5 November 2011

बात ही बात में...

दिन की और रात की;
रात की बात की;
बात ही बात में;
रात भी काट दी;
काट के पार थी;
आरजू की चांदनी;
फिर सुबह और शाम थी;
शाम की तो बात थी,
जब शमा जल उठी;
जल के यूँ पिघल उठी;
जैसे कोई जाम हो,
जाम की संगीनियाँ;
धडकनों में आम हो,
बन के दिन रात ही;
चांदनी भी ढल गई;
तुम वहीं थे, बस वहीं;
वहीं, जहाँ यकीन था;
कभी तो होगी बात भी;
दिन की और रात की;
बात ही बात में;
शाम ये भी काट दी...

clip it!

she walked in,
cautious steps;
one at a time;
tears paused
on her lips; as
she looked at me;
and we smiled,
you know,
the unsaid code;
I-am-here-to-share-yet-another-episode.
she pointed at the orchid
'shouldn't you clip it?'
why?
'to tame it a bit'
does that help?
she looked away,
it's ok. love bites and bruises, i say.
'No. just clip it'
why ?
'to hold it tight and sturdy'
really?
she sighed,
''no wonder, you are single and thirty!'